राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय ख़बरेंविविध ख़बरें

Naxalite General Secretary Surrenders: नक्सल संगठन के महासचिव देवजी ने किया सरेंडर… डेढ़ करोड़ का है इनाम

नक्सलवाद के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। सूत्रों के अनुसार प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के कथित महासचिव टिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी ने अपने 16 साथियों के साथ हथियार डालते हुए सुरक्षा बलों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। हालांकि इस घटनाक्रम की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

NAXALI DEV JI

सूत्रों का कहना है कि 31 मार्च 2026 से पहले नक्सल मोर्चे पर यह अब तक की सबसे बड़ी सफलता मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि करीब 60 वर्षीय देवजी ने तेलंगाना के मुलुगु जिले में पुलिस के सामने सरेंडर किया।

कौन हैं देवजी?

जानकारी के मुताबिक देवजी पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था। वे मूल रूप से करीमनगर जिले के निवासी बताए जाते हैं और लंबे समय से संगठन की केंद्रीय गतिविधियों में सक्रिय थे। करीब आठ महीने पहले ही उन्हें संगठन का महासचिव बनाया गया था।

यदि उनके आत्मसमर्पण की पुष्टि होती है तो यह संगठन के शीर्ष नेतृत्व के लिए बड़ा झटका माना जाएगा।

पहले भी लग चुका है बड़ा झटका

इससे पहले मई 2025 में सुरक्षा बलों ने संगठन के तत्कालीन शीर्ष नेता नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू को एक बड़े अभियान में मार गिराया था। इसके अलावा पोलित ब्यूरो सदस्य मल्लोजुला वेणुगोपाल उर्फ सोनू के आत्मसमर्पण को भी संगठन के लिए बड़ा झटका माना गया था।

ऐसे में एक वर्ष के भीतर शीर्ष नेतृत्व स्तर पर यह दूसरी बड़ी घटना हो सकती है।

अन्य कैडरों के भी सरेंडर की संभावना

सूत्रों के अनुसार देवजी के साथ 15 से 20 सशस्त्र कैडरों के भी आत्मसमर्पण करने की संभावना है। हाल के महीनों में तेलंगाना से जुड़े कई माओवादी कार्यकर्ता पड़ोसी राज्यों में भी सरेंडर कर चुके हैं। इससे संगठन की संरचना पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

केंद्र का लक्ष्य: मार्च 2026 तक माओवादी हिंसा खत्म

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक देश में माओवादी हिंसा समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। इसी दिशा में कई राज्यों में संयुक्त सुरक्षा अभियान तेज किए गए हैं।

आधिकारिक पुष्टि का इंतजार

तेलंगाना पुलिस की विशेष नक्सल विरोधी इकाइयां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। हालांकि वरिष्ठ अधिकारियों ने अभी सार्वजनिक तौर पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

पिछले एक वर्ष में संगठन के कई वरिष्ठ नेताओं के मारे जाने या आत्मसमर्पण करने से इसकी नेतृत्व संरचना पर लगातार दबाव बना हुआ है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि देवजी के आत्मसमर्पण की आधिकारिक पुष्टि कब होती है।

R.O. No. : 13538/ 53
Back to top button