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India-US trade relations: भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को नई रफ्तार, अंतरिम व्यापार समझौते का ढांचा तैयार

नई दिल्ली | भारत और अमेरिका ने द्विपक्षीय व्यापार को नई गति देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए अंतरिम व्यापार समझौते (Interim Trade Agreement) का ढांचा तैयार कर लिया है। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करना, बाजार पहुंच को आसान बनाना और भविष्य में व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement – BTA) की मजबूत नींव रखना है। दोनों देशों ने स्पष्ट किया है कि इस अंतरिम ढांचे को शीघ्र लागू किया जाएगा और तय रोडमैप के तहत अंतिम बीटीए की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा।

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इस अंतरिम समझौते के तहत भारत ने अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं पर शुल्क समाप्त या कम करने पर सहमति जताई है। साथ ही, कई अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों को भारतीय बाजार में आसान पहुंच मिलेगी। इनमें पशु आहार में उपयोग होने वाले सूखे डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGs), लाल ज्वार, मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, वाइन, स्पिरिट्स और अन्य कृषि उत्पाद शामिल हैं। इससे भारतीय आयात नीति पर असर पड़ेगा और उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प उपलब्ध होंगे।

वहीं अमेरिका ने 2 अप्रैल 2025 के कार्यकारी आदेश 14257 के तहत भारत से आयातित कुछ उत्पादों पर 18 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रावधान किया है। इसमें कपड़ा और परिधान, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबर उत्पाद, जैविक रसायन, गृह सजावट, हस्तशिल्प और कुछ मशीनरी शामिल हैं। हालांकि, अंतरिम समझौते के बाद 5 सितंबर 2025 के कार्यकारी आदेश 14346 के तहत सूचीबद्ध कुछ वस्तुओं—जैसे जेनेरिक दवाएं, रत्न एवं हीरे तथा विमान के पुर्जों—पर लगाए गए अतिरिक्त शुल्क को हटाया जाएगा।

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समझौते के अनुसार, अमेरिका भारत से आयात होने वाले कुछ विमानों और विमान पुर्जों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से लगाए गए शुल्क हटाएगा। इसके बदले भारत को ऑटोमोबाइल पुर्जों पर तरजीही शुल्क कोटा मिलेगा। इसके अलावा, दवाओं और उनसे जुड़े उत्पादों पर अमेरिकी धारा 232 के तहत चल रही जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे निर्णय लिया जाएगा।

दोनों देशों ने यह भी सहमति जताई है कि वे आपसी हित के क्षेत्रों में एक-दूसरे को निरंतर तरजीही बाजार पहुंच प्रदान करेंगे और ऐसे रूल्स ऑफ ओरिजिन तय करेंगे, जिससे समझौते का लाभ मुख्य रूप से भारत और अमेरिका को ही मिले। इसके साथ ही, व्यापार को प्रभावित करने वाली गैर-शुल्क बाधाओं को दूर करने पर भी जोर दिया गया है। भारत ने अमेरिकी चिकित्सा उपकरणों के व्यापार में मौजूद पुरानी अड़चनों को हटाने, आईसीटी उत्पादों के लिए आयात लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाने और छह माह के भीतर यह तय करने पर सहमति दी है कि अमेरिकी या अंतरराष्ट्रीय मानकों को भारतीय बाजार में स्वीकार किया जाएगा या नहीं।

तकनीकी नियमों के अनुपालन को आसान बनाने के लिए दोनों देश मानकों और अनुरूपता मूल्यांकन प्रक्रियाओं पर आपसी चर्चा करेंगे। यदि किसी एक देश द्वारा शुल्क संरचना में बदलाव किया जाता है, तो दूसरे देश को भी अपनी प्रतिबद्धताओं में संशोधन का अधिकार होगा।

इसके अलावा, भारत ने अगले पांच वर्षों में अमेरिका से लगभग 500 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कोकिंग कोयला खरीदने का इरादा जताया है। दोनों देश तकनीकी उत्पादों, विशेषकर ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट्स (GPU) और डेटा सेंटर से जुड़े उत्पादों के व्यापार को बढ़ाने तथा संयुक्त तकनीकी सहयोग को विस्तार देने पर भी सहमत हुए हैं।

डिजिटल व्यापार के क्षेत्र में भी दोनों देशों ने भेदभावपूर्ण और बोझिल प्रक्रियाओं को समाप्त करने तथा बीटीए के तहत मजबूत, महत्वाकांक्षी और पारस्परिक रूप से लाभकारी डिजिटल व्यापार नियम तय करने की प्रतिबद्धता जताई है। दोनों देशों का कहना है कि इस अंतरिम समझौते को शीघ्र अंतिम रूप दिया जाएगा, ताकि व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में तेजी से प्रगति की जा सके।

R.O. No. : 13538/ 53
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