पहले मंगला गौरी व्रत पर भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, नहीं मिलेगा पूर्ण फल

सावन का पहला मंगला गौरी व्रत 4 अगस्त यानी कल मनाया जाएगा. सावन महीने के मंगलवार को रखे जाने वाले मंगला गौरी व्रत का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है. यह व्रत माता पार्वती को समर्पित होता है, जिसे सुहागिन महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य, सुखी वैवाहिक जीवन और पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं. इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर मां पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है, लेकिन कुछ ऐसी गलतियां हैं जिन्हें इस दिन करने से बचना चाहिए.
काले या नीले रंग के कपड़े पहनना
पूजा या व्रत के समय काले या नीले रंग के वस्त्र पहनने से बचना चाहिए. इन रंगों को पूजा-पाठ के लिए शुभ नहीं माना जाता है. इस दिन लाल, पीला, हरा या नारंगी रंग के कपड़े पहनना अत्यंत शुभ होता है.
सोलह श्रृंगार की अनदेखी
माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करना इस व्रत का सबसे अहम हिस्सा है. पूजा में माता को सोलह श्रृंगार (चूड़ियां, सिंदूर, बिंदी, महावर आदि) जरूर चढ़ाएं. ध्यान रखें कि पूजा के बाद यह सुहाग का सामान किसी जरूरतमंद सुहागिन महिला को दान कर दें, इसे खुद इस्तेमाल न करें.
तामसिक भोजन का सेवन
मंगला गौरी व्रत के दिन शुद्धता का विशेष ध्यान रखना पड़ता है. इस दिन घर में लहसुन, प्याज, मांस-मदिरा या किसी भी प्रकार के तामसिक भोजन का इस्तेमाल न करें. सात्विक भोजन ही ग्रहण करें.
पूजा या आरती को अधूरा छोड़ना
पूजा को जल्दबाजी में न करें. विधि-विधान से माता गौरी और भगवान शिव की पूजा करने के बाद आरती अवश्य गाएं. बिना आरती के पूजा अधूरी मानी जाती है.
बड़े-बुजुर्गों या पति का अनादर
व्रत के दिन मन और आचरण दोनों को पवित्र रखना जरूरी है. किसी भी बड़े, विशेषकर अपने पति या घर के बुजुर्गों का अपमान न करें और न ही किसी पर क्रोध करें. घर में वाद-विवाद की स्थिति से दूर रहें.





