Railway Pension Rules 2026: 100% तक फैमिली पेंशन का प्रावधान, जानें नए नियम

नई दिल्ली
रेलवे में नौकरी करने वालों के लिए पेंशन से जुड़ा एक ऐसा नियम आया है, जिसे कर्मचारी और उनके परिवार को जरूर समझना चाहिए. नौकरी के दौरान अगर किसी कर्मचारी को गंभीर बीमारी, हादसे या किसी ऐसी घटना का सामना करना पड़ता है, जिसका संबंध उसकी सेवा से है, तो उसके बाद मिलने वाली पेंशन सामान्य नियमों से अलग हो सकती है. कर्मचारी की स्थिति, मौत या डिसएबिलिटी किस तरह की घटना से जुड़ी है, इसके आधार पर पेंशन का पूरा ढांचा तय होगा।
रेलवे ने अब इसके लिए नए नियम लागू कर दिए हैं. रेलवे बोर्ड ने 'रेल सर्विस एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन रूल्स, 2026' को नोटिफाई कर दिया है. नए नियमों ने 1993 के एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन रूल्स की जगह ली है. इनमें सेवा के दौरान मौत या डिसएबिलिटी से जुड़े मामलों के अलावा फैमिली पेंशन, मेडिकल बोर्ड की अपील, डिसएबिलिटी की गणना, सेवा से जुड़ी बीमारियां और पेंशन में देरी जैसे कई प्रावधान शामिल किए गए हैं।
किन कर्मचारियों और परिवारों को मिलेगा फायदा?
नए नियम उन मामलों में लागू होंगे, जहां कर्मचारी की डिसएबिलिटी या मौत का संबंध रेलवे सेवा से हो. अगर कर्मचारी डिसएबिलिटी के बाद भी रेलवे की सेवा में बना रहता है, तब भी इन नियमों के तहत प्रावधान लागू हो सकते हैं. इसके अलावा एक्स्ट्राऑर्डिनरी फैमिली पेंशन के दायरे में आने वाले परिवार भी इन नियमों से कवर होंगे. यानी कर्मचारी की सेवा से जुड़ी मौत की स्थिति में उसके परिवार को मिलने वाली पेंशन भी घटना की कैटेगरी के हिसाब से तय होगी. NPS के तहत आने वाले कर्मचारियों के लिए लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि उन्होंने 2025 के संबंधित नियमों के तहत कौन-सा विकल्प चुना है।
नए रूल्स में मौत और डिसएबिलिटी की 4 कैटेगरी
नए नियमों में सेवा से जुड़ी मौत और डिसएबिलिटी को चार कैटेगरी में बांटा गया है. इन्हीं कैटेगरी से यह तय होगा कि कर्मचारी या उसके परिवार को किस तरह का पेंशन लाभ मिलेगा।
Category A: ऐसी मौत या डिसएबिलिटी जो प्राकृतिक कारणों से हुई हो और जिसका रेलवे सेवा से कोई संबंध नहीं हो।
Category B: ऐसी मौत या डिसएबिलिटी जो रेलवे सेवा के कारण हुई हो या सेवा की वजह से बढ़ी हो।
Category C: दंगे, हिंसा, खराब मौसम, राहत या बचाव अभियान जैसी गंभीर परिस्थितियों में हुई मौत या डिसएबिलिटी।
Category D: आतंकवादी हमले, युद्ध जैसी परिस्थितियों या दुश्मन की कार्रवाई से जुड़े मामले।
यानी हर मामले में एक जैसा पेंशन नियम लागू नहीं होगा. घटना की प्रकृति के आधार पर कर्मचारी या परिवार का लाभ बदल सकता है।
डिसएबिलिटी पेंशन कैसे तय होगी?
नई व्यवस्था में डिसएबिलिटी पेंशन को दो हिस्सों में बांटा गया है- सर्विस एलीमेंट और डिसएबिलिटी एलीमेंट. सर्विस एलीमेंट कर्मचारी की पेंशन योग्य सैलरी यानी इमोल्यूमेंट्स या एवरेज इमोल्यूमेंट्स के 50% के बराबर होगा, जो भी अधिक हो. कैटेगरी B, C और D में 100% डिसएबिलिटी होने पर डिसएबिलिटी एलीमेंट 30% होगा. इस तरह 100% डिसएबिलिटी की स्थिति में पेंशन का ढांचा 50% सर्विस एलीमेंट और 30% डिसएबिलिटी एलीमेंट से बनेगा. खास बात यह है कि इसके लिए न्यूनतम क्वालिफाइंग सर्विस की शर्त नहीं रखी गई है. यानी 10 साल से कम सेवा वाले कर्मचारी को भी सर्विस एलीमेंट मिल सकता है. हालांकि ऐसी स्थिति में सर्विस ग्रेच्युटी का लाभ नहीं मिलेगा।
डिसएबिलिटी का प्रतिशत कैसे तय होगा?
डिसएबिलिटी का प्रतिशत भी पेंशन तय करने में अहम भूमिका निभाएगा. मेडिकल बोर्ड अगर डिसएबिलिटी 50% तक तय करता है, तो डिसएबिलिटी एलीमेंट के लिए 50% ही माना जाएगा. अगर डिसएबिलिटी 50% से ज्यादा और 75% तक है, तो गणना के लिए इसे 75% माना जाएगा. वहीं 75% से ज्यादा और 100% तक डिसएबिलिटी होने पर 100% माना जाएगा. इस व्यवस्था को डिसएबिलिटी की ब्रॉड-बैंडिंग कहा गया है. इसका मकसद यह है कि कुछ स्तर की डिसएबिलिटी होने पर पेंशन की गणना कर्मचारी के लिए ज्यादा अनुकूल तरीके से की जा सके।
मौत होने पर परिवार को कितनी पेंशन?
यहीं नए नियमों का एक अहम हिस्सा सामने आता है. Extraordinary Family Pension में विधवा या विधुर (जिसकी पत्नी मर गई हो) के अलावा पात्र आश्रित बच्चे, माता-पिता और आश्रित भाई-बहन भी शामिल हो सकते हैं. कैटेगरी A के मामलों में सामान्य पेंशन नियम लागू होंगे. लेकिन सेवा से जुड़ी गंभीर घटनाओं वाली कैटेगरी B, C और D में परिवार को अलग प्रावधान के तहत पेंशन मिलेगी. कैटेगरी B में फैमिली पेंशन कर्मचारी की पे के 60% के बराबर होगी. वहीं कैटेगरी C और D में फैमिली पेंशन कर्मचारी की बेसिक पे के 100% के बराबर होगी।
रेलवे बोर्ड के नियमों के मुताबिक फैमिली पेंशन ₹18,000 से कम नहीं होगी. अगर डिसएबिलिटी पेंशन पा रहा कर्मचारी उसी चोट या बीमारी के कारण बाद में मृत्यु को प्राप्त होता है, तो उसके लिए भी अलग प्रावधान दिए गए हैं. डिसएबिलिटी रिटायरमेंट की तारीख से सात साल के भीतर ऐसी मौत होने पर संबंधित कैटेगरी के तहत Extraordinary Pension का लाभ परिवार को मिल सकता है।
नौकरी जारी रही तो क्या होगा?
मान लीजिए किसी कर्मचारी को डिसएबिलिटी हुई, लेकिन रेलवे ने उसे नौकरी से हटाने के बजाय सेवा में बनाए रखा. ऐसी स्थिति में उसे हर महीने डिसएबिलिटी एलीमेंट नहीं मिलेगा. इसके बजाय डिसएबिलिटी एलीमेंट की कैपिटलाइज्ड वैल्यू के आधार पर एकमुश्त मुआवजा दिया जाएगा. गजट नोटिफिकेशन में इसका उदाहरण भी दिया गया है. अगर कर्मचारी की उम्र 40 साल है, बेसिक पे ₹30,000 महीना है, वह Category B में आता है और डिसएबिलिटी 40% है, तो 30% डिसएबिलिटी एलीमेंट और 9.075 के कम्यूटेशन फैक्टर के आधार पर एकमुश्त रकम ₹3,92,040 बनती है।
पेंशन के लिए अलग से आवेदन नहीं
नए नियमों में कर्मचारियों और परिवारों के लिए एक अहम राहत आवेदन की प्रक्रिया को लेकर है. डिसएबिलिटी पेंशन या Extraordinary Family Pension के लिए अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी. संबंधित केस की जांच और उसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी हेड ऑफ ऑफिस की होगी. मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के आधार पर मामले पर फैसला किया जाएगा. डिसएबिलिटी पेंशन के मामलों में तय समय के भीतर पेंशन पेमेंट ऑर्डर (PPO) जारी करना होगा।
पेंशन में देरी हुई तो इंटरेस्ट मिलेगा
नए नियमों में पेंशन भुगतान में देरी को लेकर भी प्रावधान किया गया है. अगर प्रशासनिक चूक या लापरवाही की वजह से पेंशन जारी होने में देरी होती है, तो पेंशनर या फैमिली पेंशनर को बकाया रकम पर ब्याज देना होगा. इसका मतलब यह है कि पेंशन की प्रक्रिया में देरी होने पर कर्मचारी या परिवार को सिर्फ बकाया रकम का इंतजार नहीं करना पड़ेगा, बल्कि नियमों के तहत ब्याज का भी प्रावधान है।
मेडिकल बोर्ड की अपील और दूसरी सुविधाएं
नए एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन रूल्स में मेडिकल बोर्ड के फैसले के खिलाफ अपील, डिसएबिलिटी की ब्रॉड-बैंडिंग और सेवा से जुड़ी बीमारियों जैसे मामलों को भी शामिल किया गया है. इसके अलावा पेंशन भुगतान में देरी और अटेंडेंट अलाउंस से जुड़े प्रावधान भी नए नियमों का हिस्सा हैं।
रेलवे कर्मचारियों के लिए क्यों जरूरी ये नियम?
इन नियमों को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि सेवा के दौरान किसी कर्मचारी के साथ हुई घटना को किस कैटेगरी में रखा जाता है, उसी के आधार पर पेंशन और परिवार को मिलने वाला लाभ तय होगा. खास तौर पर कैटेगरी B, C और D में आने वाले मामलों में कर्मचारी की डिसएबिलिटी और परिवार की पेंशन के लिए अलग प्रावधान हैं. वहीं NPS कर्मचारियों को अपने चुने गए विकल्प के आधार पर लाभ देखना होगा. यानी रेलवे कर्मचारी के लिए सिर्फ यह जानना काफी नहीं है कि एक्स्ट्राऑर्डिनरी पेंशन का नियम बदल गया है. यह समझना भी जरूरी है कि उसका मामला किस कैटेगरी में आएगा, डिसएबिलिटी कितनी मानी जाएगी और जरूरत पड़ने पर परिवार को किस आधार पर पेंशन मिलेगी।





