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धर्म और आस्था

दशहरे पर शमी पूजन और शस्त्र पूजा क्यों होती है? जानें पौराणिक मान्यता और पूजा की विधि

  Dussehra 2026 : दशहरे पर शस्त्र पूजा करने की परंपरा आज भी कई परिवारों में निभाई जाती है। विजयादशमी के दिन लोग अपने पारंपरिक शस्त्रों की साफ-सफाई करके उनकी पूजा करते हैं। तलवार और दूसरे शस्त्रों के अलावा कई जगहों पर कामकाज में इस्तेमाल होने वाले औजारों की भी पूजा होती है। इस साल दशहरा 20 अक्टूबर को है। ऐसे में शस्त्र पूजा करने वाले लोग शुभ मुहूर्त में पूजा कर सकते हैं।

शस्त्र पूजा का शुभ समय
पंचांग के अनुसार, 20 अक्टूबर को विजय मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 59 मिनट से 2 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। इस समय शस्त्र पूजा की जा सकती है। हालांकि, स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में अंतर हो सकता है।

घर पर कैसे करें शस्त्र पूजा
शस्त्र पूजा के लिए सबसे पहले पूजा की जगह साफ कर लें। शस्त्रों को सावधानी से साफ करके सुरक्षित स्थान पर रखें। पूजा के लिए रोली, अक्षत, फूल, धूप और दीपक रख लें। भगवान गणेश और मां दुर्गा का स्मरण करके पूजा शुरू करें। शस्त्रों पर रोली से तिलक लगाएं। इसके बाद फूल और अक्षत चढ़ाकर धूप-दीप दिखाएं। पूजा के बाद भोग लगाएं और प्रसाद बांट दें।

विजयादशमी पर क्यों होती है शस्त्र पूजा?
दशहरे को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था। मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय की कथा भी विजयादशमी से जुड़ी है। पुराने समय में राजा और योद्धा अपने शस्त्रों की पूजा करते थे। युद्ध और आत्मरक्षा में शस्त्रों की अहम भूमिका थी। इसी परंपरा के तहत आज भी कई परिवार दशहरे पर शस्त्र पूजा करते हैं। कुछ जगहों पर इस दिन औजारों और कामकाज में इस्तेमाल होने वाली मशीनों की पूजा भी की जाती है।

दशहरे पर शमी पूजन की परंपरा
विजयादशमी पर शमी के पेड़ की पूजा भी की जाती है। महाभारत से जुड़ी मान्यता के अनुसार, पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान अपने शस्त्र शमी के पेड़ पर छिपाए थे। बाद में उन्होंने इन्हें वापस प्राप्त किया। इसी वजह से कई जगहों पर दशहरे के दिन शमी पूजन किया जाता है।

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