युवा मतदाताओं पर चुनाव आयोग का फोकस, जेन-जी और जेन अल्फा को लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़ेगा

नई दिल्ली
चुनाव आयोग ने 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले जेन अल्फा और जेन-जी (Gen-Z) तक पहुंचने की कोशिशें फिर शुरू की हैं। आयोग का मकसद उन्हें जागरूक वोटर बनाना है, जो चुनावी प्रक्रिया से अच्छी तरह परिचित हों और भविष्य में लोगों को जागरूक करने वाले अभियानों की अगुआई कर सकें।
आयोग के नए अभियान में देश की 4,123 विधानसभा सीटों के स्कूलों, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स को जोड़ा जाएगा। इसमें कक्षा 9 से 12 तक के स्कूली बच्चों के साथ कॉलेज और यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स शामिल होंगे।
हर सीट पर 10 साक्षरता क्लब बनाए जाएंगे
आयोग 50 हजार चुनावी साक्षरता क्लब (ईएलसी) बनाने की योजना पर काम कर रहा है। हर विधानसभा सीट में ऐसे 10 क्लब बनाए जाएंगे।
इसके लिए आयोग 15 लाख स्कूलों में कक्षा 9 से 12 तक के छात्रों से संपर्क करेगा। इसके अलावा 70 हजार कॉलेजों और 1,400 यूनिवर्सिटी तक भी पहुंच बनाई जाएगी।
2018 में शुरू हुए थे ईएलसी
चुनावी साक्षरता क्लब 2018 में सिस्टमेटिक वोटर्स एजुकेशन एंड इलेक्टोरल पार्टिसिपेशन (एसवीईईपी) कार्यक्रम के तहत शुरू किए गए थे। इनका मकसद छात्रों को लोकतांत्रिक मूल्यों, चुनावी प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका व कामकाज से परिचित कराना था।
डिजिटल तरीके से लगातार जुड़ने पर जोर
आयोग के मुताबिक, कम्युनिकेशन का तरीका तेजी से बदल रहा है और लोग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ज्यादा निर्भर हो रहे हैं। युवा मतदाताओं और जमीनी स्तर से जुड़े लोगों के साथ लगातार, व्यवस्थित और सीधे संपर्क की जरूरत को देखते हुए ईएलसी 2.0 की योजना बनाई गई है।
ईएलसी 2.0 में इन क्लबों को डिजिटल सुविधाओं से लैस, व्यवस्थित और लगातार जुड़े रहने वाले ढांचे के तौर पर फिर से तैयार किया जाएगा।
2029 तक कितनी बड़ी होगी 'जेन जी'?
जनसांख्यिकी अनुमानों के मुताबिक भारत में 2029 तक 'जेन जी' की आबादी करीब 38 करोड़ होगी. इनमें 'जेन जी' पुरुषों की संख्या करीब 19.9 करोड़, तो महिलाएं लगभग 18.1 करोड़ होंगी।
उस समय अगर अनुमानित मिलेनियल्स की संख्या से तुलना करें, तो देश में तब मिलेनियल्स की संख्या लगभग 35.7 करोड़ रहने का अनुमान है।
यानी ये वो पहला मौका होगा जब पहली बार भारत की सबसे बड़ी वयस्क पीढ़ी 'जेन जी' होगी।
इसका चुनावी महत्व क्या है?
'जेन जी' केवल संख्या में बड़ी नहीं होगी बल्कि यह समाज के सबसे सक्रिय वर्ग का प्रतिनिधित्व करेगी।
उस दौरान करोड़ों की संख्या में वो 'जेन जी' पहली बार वोट डालने वाले युवा होंगे. इसमें कॉलेज, यूनिवर्सिटी और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र शामिल होंगे. तो नौकरी की तलाश में बेरोजगार युवा भी होंगे. वहीं ऐसे युवा भी होंगे जो अपना स्टार्टअप शुरू कर रहे होंगे. साथ ही इनमें अपना करियर स्टार्ट कर चुके और परिवार बसा रहे युवा भी शामिल होंगे।
किन मुद्दों पर केंद्रित होगी राजनीति?
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि 2029 तक चुनावी बहस का बड़ा हिस्सा कई विषयों पर आधारित हो सकता है. इनमें शिक्षा, रोजगार, महंगाई, घर, स्टार्टअप्स, क्लाइमेट चेंज और शासन-प्रशासन शामिल होगा।
रोजगारः भारत हर साल लाखों युवाओं को रोजगार बाजार में प्रवेश करते देख रहा है. क्वालिटी जॉब्स, निजी निवेश और स्किल डेवलपमेंट सबसे बड़े चुनावी मुद्दों में शामिल हो सकते हैं।
शिक्षाः पेपर लीक, परीक्षा के आयोजनों में सुधार, डिजिटल शिक्षा, विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता और रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर युवाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण विषय बन चुके हैं।
महंगाईः शुरुआती करियर वाले युवाओं के लिए घर खरीदना, किराया, स्वास्थ्य, परिवहन और जीवन-यापन की लागत बड़ा मुद्दा बन सकती है।
घरः बड़े शहरों में प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतें और किराया युवा मतदाताओं को सीधे प्रभावित करेंगे।
स्टार्टअप और AI: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ऑटोमेशन और फ्यूचर जॉब्स भी राजनीतिक बहस का हिस्सा बन सकती हैं।
क्लाइमेट चेंजः 'जेन जी' पर्यावरण और क्लीन एनर्जी जैसे मुद्दों पर पहले की पीढ़ियों की तुलना में अधिक ऊर्जा और सतत विकास जैसे मुद्दों पर पहले की पीढ़ियों की तुलना में अधिक प्रतिक्रिया देने वाली पीढ़ी मानी जाती है।





